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ऊना : दिल्ली से नौकरी छोड़ अपनाया डेयरी फार्म का व्यवसाय।

प्रदेश सरकार द्वारा बेरोजगारी को दूर करने के लिए अनेकों योजनाएं शुरू की गई है। इन योजनाओं से लाभान्वित युवा अपना व्यवसाय खोलकर अच्छी आमदनी अर्जित कर रहे हैं । जिला ऊना के लोअर बढ़ेडा के अजय चंदेल और ईसपुर के यादविंदर ने पशुपालन विभाग द्वारा संचालित योजनाओं का लाभ उठाकर डेयरी फार्म का व्यवसाय अपनाया है। डेयरी फार्म के व्यवसाय करने से सालाना लाखों रुपये की आमदनी अर्जित कर रहे हैं। वहीं पशुपालन विभाग द्वारा भी पशुपालकों को हर सम्भव सहायता मुहैया करवाई जा रही है ! हिमाचल प्रदेश सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ उठाकर अनेकों बेरोजगार युवाओं ने अपना व्यवसाय खोलकर अच्छी आमदनी अर्जित करना शुरू कर दी है। ऊना जिला के लोअर बढेड़ा निवासी अजय कुमार चंदेल ने डेयरी फार्म का व्यवसाय शुरू किया। इससे पहले एमबीए फाइनेंस करने के बाद वह दिल्ली में नौकरी करने लगे और एक वर्ष पूर्व उन्होंने लोअर बढेड़ा में अपने गांव वापिस आकर डेयरी फार्म खोला। आज उनके डेयरी फार्म में 11 बड़े तथा 8 छोटे पशु हैं। रोजाना दूध का उत्पादन एक क्विंटल है और सीजन आने पर उत्पादन बढ़कर अढ़ाई क्विंटल तक पहुंच जाता है। दूध की ज्यादातर खपत ऊना में ही है और बाकी बचे हुए दूध को वह वेरका कंपनी को बेचते हैं। अजय का कहना है कि वह दूध की प्रोसेसिंग में स्वयं उतरना चाहते हैं। दूध की प्रोसेसिंग का अपना प्लांट लगाकर वह लोगों को शुद्ध दूध उपलब्ध करवाना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि फार्म को आधुनिक तरीके से डिजाइन किया गया है, जिसमें पशुओं के बैठने से लेकर उनके खाने की जगह तक वैज्ञानिक आधार पर डिजाइन की गई है और इस काम में पशु पालन विभाग के अधिकारियों ने उनकी भरपूर मदद की। यही नहीं विभाग ने उन्हें दुधारू गायों की विभिन्न नस्लों के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की। विभाग से उन्हें सभी तरह की तकनीकी जानकारी उपलब्ध करवाई जा रही है। पशुओं के लिए फीड भी खुद ही तैयार करवाते हैं ! अजय कुमार चंदेल ने कहा कि डेयरी फार्मिंग में अच्छा मुनाफा है, लेकिन युवाओं को इस काम में संयम रखने व मेहनत करने की आवश्यकता है। बिना मेहनत कुछ भी हासिल नहीं किया जा सकता ! वहीं इसी तरह ईसपुर निवासी  यादविंदर पाल ने भी वर्ष 2015 में डेयरी फार्मिंग का व्यवसाय अपनाया। नाबार्ड के तहत 5.22 लाख रुपए का ऋण लिया जिस पर उन्हें 35 प्रतिशत सब्सिडी प्राप्त हुई और 1.35 लाख रुपए सब्सिडी के तौर पर मिले। आज यादविंदर कड़ी मेहनत से प्रतिमाह लगभग अढ़ाई लाख रुपए का दूध बेच रहे हैं। कृष्णा डेयरी नाम से उन्होंने 40 कनाल भूमि पर फार्म स्थापित किया और आज उनके पास कुल 27 गाय व भैंसें हैं। प्रतिदिन वह अपने इस डेयरी फार्म से लगभग सवा दो क्विंटल दूध बेच रहे हैं। ज्यादातर दूध की सप्लाई ऊना शहर में घर-घर जाकर की जाती है ! वहीं यादविंदर का कहना है कि डेयरी फार्मिंग का व्यवसाय बहुत ही अच्छा है लेकिन मेहनत से ही सफलता प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार की योजना और सब्सिडी का लाभ लेकर उनके परिवार को आय का अच्छा साधन मिल गया है। नाबार्ड से मिला लोन वह पूरा चुकता कर चुके हैं। पाल ने बताया कि पशु पालन विभाग के अधिकारी उन्हें उनके काम में भरपूर सहायता कर रहे हैं।वहीं वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी ऊना डॉ. राकेश भट्टी की माने तो नाबार्ड के तहत सरकार डेयरी के लिए अधिकतम 10 लाख रुपए तक का ऋण प्रदान करती है ! जिसमें सामान्य वर्ग के लिए 25 प्रतिशत तथा एससी-एसटी के लिए 35 प्रतिशत सब्सिडी उपलब्ध करवाई जा रही  है। उन्होंने कहा कि जिला ऊना में डेयरी फार्मिंग के प्रति युवाओं का रुझान बढ़ा है और पढ़ा-लिखा वर्ग भी पशु पालन के माध्यम से जुड़ रहा है !

 

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