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 मंडी जिला के रिवालसर में बीती 18 सितंबर से समाधि में लीन हुए लामा वांगडोर रिम्पोछे का अंतिम संस्कार बुधवार को 49 दिनों के बाद किया गया। 49 दिनों तक उनका पार्थिव शरीर को पूरी तरह से संभाल कर रखा गया था।  बुधवार को बौद्ध धर्म के विधि विधानों के अनुसार रिवालसर जिगर बौद्ध मंदिर में ही उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान उनके पार्थिव शरीर को कपड़ों से लपेट विशेष परिधान पहनाए। इसके बाद बैठी हुई मुद्रा में उनके शरीर को एक पालकी में बैठाकर सभी श्रद्धालुओं के लिए अंतिम दर्शनों के लिए रखा गया। यहां पर देश विदेश से आए श्रद्धालुओं ने बौद्ध गुरू के अंतिम दर्शन किए व उन्हे भावभिनी श्रद्धांजली अर्पित की। इसके उपरांत उनका रिवालसर के जिगर बौद्ध मंदिर के परिसर में पूरे विधि विधान के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस दौरान यहां पर श्रद्धालुओं का जमावड़ा भी लगा रहा। बौद्ध धर्म की मान्यताओं के अनुसार चारों दिशाओं से बड़े बौद्ध धर्म गुरूओं ने पूजा अर्चना कर लामा का अंतिम संस्कार के लिए आहुति डाली। इस दौरान मंदिर परिसर में सैंकड़ों की तादात में लामाओं ने विधि पूर्वक पूजा अर्चना की और वाद्य यंत्रों की धुन भी बजाई। मिली जानकारी के अनुसार अब लामा वांगडोर रिम्पोछे के शरीर के अवशेष को स्तूप के अंदर सहेज कर रखा जाएगा। बतादें कि बौद्ध धर्म के अनुसार लामा रिम्पोछे का समाधि में लीन होने बाद 49वें दिन दाह संस्कार किया जाता है। उससे पहले यदि देह को नुकसान पहुंचना शुरू हो जाता है तो फिर बौद्ध धर्म के अनुसार ही उसे सहेजने का प्रयास किया जाता है। तब तक मंदिर में पूजा पाठ का सिलसिला जारी रहता है और उनके अंतिम दर्शन भी सभी को करवाए जाते हैं।
 

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