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भारत में पहली बार होगी डिजिटल जनगणना

मुकुलदेव रक्षपति 

वर्ष 2021 में देश की जनगणना होने वाली है और यह पहला मौका होगा कि इस जनगणना को डिजिटल फार्मेट में किया जाएगा। यही नहीं जल्द ही सभी उपयोगिताओं के लिए एक ही कार्ड बनाने की योजना पर भी विचार चल रहा है। यह शब्द देश के गृह मंत्री अमित शाह ने भारत के रजिस्ट्रार जनरल के नए भवन की नीव रखते हुए कहे। उनका कहना था कि जनगणना विभाग के पास क्षमता है कि आधार, पैन, ड्राइविंग लाइसेंस आदि को एक ही जगह, एक मंच पर ला सकती है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इस सुझाव का कोई औपचारिक प्रस्ताव अभी तक नहीं है, लेकिन इसकी उपयोगिता और क्षमता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। बावजूद इसके जनगणना विभाग इस योजना को सफल बना सकता है। बता दें कि आगामी जनगणना 2021 में होनी है और भारत के इतिहास में पहली बार इसे  डिजिटल फॉर्मेट में किया जाएगा। बताया जा रहा है कि जनगणना और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर पर 12 हजार करोड़ खर्च होंगे।


क्या फर्क है जनगणना और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर में:


जनगणना हमें बताती है कि देश के कितने स्थायी नागरिक हैं, जो मौजूदा समय देश में रह रहे हैं। इससे हमें देश के बढ़ते व घटते जन्म और मृत्यु दर के बारे में पता चलता है। दूसरी ओर राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर, किसी व्यक्ति विशेष, जो एक स्थान पर 6 महीने या इससे अधिक समय से रह रहा है, उसकी गिनती करता है। हमारे देश में जनगणना हर 10 साल में एक बार होती है, जबकि राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर हर 5 साल में अपडेट किया जाता है। 2010-2015 के बाद अब सितंबर 2020 में राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर को अपडेट किया जाएगा।

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