Tue, October 20
सोलन
October 12,2019

अर्धमि का करके विनाश फैलाया राम राज्य, करो आज प्रतिज्ञा सभी बुराई को खत्म करेंगे आज।

लाइव टाइम्स टीवी से मैं सिमरजीत कौर आप सभी को विजयदशमी की हार्दिक शुभकामनाएं देती हुं। आइए जानते हैं पांच कहानियां जो आप विजयदशमी के बारे में शायद ही जानते होंगे। विजयदशमी का त्यौहार बड़ी धुमधाम से मनाया जाता है। यह त्यौहार वीरता का पूजक, शौर्य का उपासक है। असत्य पर सत्य की विजय के रूप में और व्यक्ति व समाज के रक्त में वीरता प्रकट हो इसीलिए दशहरे को मनाया जाता है। दशहरे का पर्व दस प्रकार के पापों काम, क्रोध, लोभ, मोह, मास मदिरा, अहंकार, आलस्य, हिंसा और चोरी जैसे अवगुणों को छोडऩे की प्रेरणा भी देते हैं। दशहरे के उत्सव मेेंं कई कल्पनाएं भी है।

कुछ लोगों का मानना है कि यह कृषि का उत्सव है भारत कृषि प्रधान देश है और किसान अपने खेतों से अनाज रूपी संपति घर लेकर आता है जिससे उसकी खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहता और वह अनाज की पुजा करता है और धूमधाम से दशहरा मनाता है।

कुछ लोगों के अनुसार यह रणयात्रा का प्रतीक है। प्रचीन काल में राजा लोग इस दिन विजय की प्रार्थना कर रण यात्रा के लिए प्रस्थान भी करते थे।

कुछ लोगों के अनुसार दशहरे का संबंध नवरात्री से भी है क्योंकि नवरात्र के उपरांत ही यह उत्सव होता है और इसमें महिषासुर के विरोध में देवी के साहसपूर्ण कार्य का उल्लेख भी मिलता है। विजयदशमी नवरात्रों के बाद दसवें दिन मनाया जाता है।

और इसी के साथ हिमाचल के कुल्लू में विजय दशमी के पर्व को मनाने की परंपरा राजा जगत सिंह के समय से मानी जाती है। इस कथा के अनुसार राजा जगत सिंह ने अयोध्या सें रघुनाथ जी की मुर्ति लाकर कुल्लू में स्थापित की थी। कथा के अनुसार जब राजा जगत सिंह को पता चला कि मणिकर्ण के एक गांव में एक ब्राहम्ण के पास एक किमती रत्न है तो राजा के मन ही मन में उस रतन को पाने की इच्छा हुई तो राजा ने सैनिकों को उस रतन को लाने का आदेश दिया और सैनिकों ने ब्राहम्ण को बहुत सताया। इन यातनाओं से मुक्ति पाने के लिए ब्राहम्ण व उसके परिवार ने आत्महत्या कर ली व ब्राहम्ण मरने से पहले राजा को श्राप दे जाता है जिससे राजा का स्वास्थ्य लगातार बिगडऩे लगता है। इस श्राप से मुक्ति पाने के लिए राजा ने स्वयं को रघुनाथ जी को समर्पित कर दिया और उसी दिन से कुल्लू में बड़ी धूमधाम से दशहरा मनाया जाता है।

जैसे कि आप सभी जानते हैं कि राम ने रावण का इस दिन वध किया था, रावण राम की पत्नी देवी सीता का अपहरण कर लंका ले गया था, भगवान राम युद्ध की देवी मां दुर्गा के भगत थे। उन्होंने युद्ध के दौरान पहले नौ दिनों तक मां दुर्गा की पूजा की और दसवें दिन रावण का वध किया। और इन्हीं नौ दिनों तक राम लीला का भी आयोजन किया जाता है, जिसमें कलाकार राम, सीता, लक्षमण, रावण, मेघनाथ, कुभंकरण के रूप धारण करते हैं और अंतिम दिन रावण, कुंभकरण, मेघनाथ के पुतले जलाए जाते हैं। यह त्यौहार बुराई पर अच्छाई का प्रतीक है।

और अंत में राम ने रावण का वध कर दिया राम ने रावण को मार दिया। मेरा यह सवाल आप सभी से है कि क्या सच में रावण मर गया है या नहीं इसको जानने के लिए आप जुड़े रहिए लाइव टाइम्स टीवी के चैनल के साथ, और लाइक, शेयर और सब्सक्राइब करना मत भूलिएगा। और एक बार फिर से लाइव टाइम्स टीवी की तरफ से आप सभी को विजयदशमी की हार्दिक शुभकामनाएं।

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