Mon, October 19
सोलन
August 05,2020

लाइव टाइम्स डेस्क 

अयोध्या राम मंदिर निर्माण : 500 साल बाद साकार हुआ सपना 

आज का दिन यानी 5 अगस्त इतिहास के पन्नो में स्वर्णिम अक्षरों से  लिखा जाएगा ,क्योंकि 500 सालों से चली आ रही कोशिशों को आज सही मायनो में आयाम मिला है ,लम्बी लड़ाई लड़ने के बाद आज अयोध्या में राम मंदिर का भूमि पूजन सम्पन्न हुआ, और लाखो करोड़ो देशवासी ख़ुशी से झूम उठे ,इस भूमि पूजन में देश के मुखिया प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी पहुंचे और शुभ मुहूर्त में शुभ कार्य को अंजाम दिया।

आज की इस खास रिपोर्ट में हम आपको  बताएंगे की आखिर क्या है अयोध्या का इतिहास , क्यों हुआ अयोध्या में राम मंदिर और मस्जिद को लेकर विवाद और किन किन लोगो की इस पुरे संघर्ष के दौरान रही अहम भूमिका।

अयोध्या यानी ईश्वर का नगर ,जिसकी अथर्वेद में सपंन्नता की तुलना स्वर्ग से की गयी है । स्कंदपुराण के अनुसार अयोध्या शब्द में  'अ'  माने ब्रह्मा, 'य' माने  विष्णु है तथा 'ध' रुद्र का स्वरूप है।

अयोध्या में अनेको ऋषि मुनि और यशस्वी राजाओं ने जन्म लिया ,जिन में से भगवान् राम भी एक है ,जैन मत के अनुसार यहां आदिनाथ सहित 5 तीर्थंकरों का जन्म हुआ था। आक्रांताओं के आने के पहले यहां हिन्दू, जैन और बौद्ध धर्म के सैकड़ों मंदिर और स्तूप थे।

आइये जानते है की आखिर किसने की अयोध्या की स्थापना ?

सरयू नदी के तट पर बसे इस नगर की रामायण अनुसार सूर्य के पुत्र मनु महाराज द्वारा स्थापना की गई थी। मनु के दस पुत्र थे जिनमे से एक इक्ष्वाक्षु भी था ,इक्ष्वाक्षु कुल में कई प्रतापी राजा हुए ,और इसी कुल में आगे जाकर भगवान राम का जन्म हुआ ।इस तरह अयोध्या पर महाभारत काल तक इसी वंश का शासन रहा।

कहते हैं कि भगवान श्रीराम के जल समाधि लेने के पश्चात अयोध्या कुछ काल के लिए उजाड़-सी हो गई थी, लेकिन उनकी जन्मभूमि पर बना महल वैसे का वैसा ही रहा। उसके पश्चात भगवान श्रीराम के पुत्र कुश ने एक बार पुन: राजधानी अयोध्या का पुनर्निर्माण करवाया । जिसके बाद  बाद सूर्यवंश की अगली 44 पीढ़ियों तक इसका अस्तित्व आखिरी राजा, महाराजा बृहद्बल तक अपने चरम पर रहा। कौशलराज बृहद्बल की मृत्यु महाभारत युद्ध में अभिमन्यु के हाथों हुई थी। महाभारत के युद्ध के बाद अयोध्या उजड़-सी हो गई, मगर श्रीराम जन्मभूमि का अस्तित्व फिर भी बना रहा।

उसके  बाद यह भी उल्लेख मिलता है कि ईसा के लगभग 100 वर्ष पूर्व उज्जैन के चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य ने उन्होंने जन्मभूमि पर काले रंग के कसौटी पत्थर वाले 84 स्तंभों पर विशाल मंदिर का निर्माण करवाया ,जिसकी भव्यता अपने आप में देखते ही बनती थी।

इतिहासकारों के अनुसार अयोध्या एक महत्वपूर्ण व्यापार का केंद्र था  , 5वीं शताब्दी  ईसा पूर्व के दौरान इस स्थान को अंतरराष्ट्रीय पहचान  तब मिली जब यह एक प्रमुख बौद्ध केंद्र के रूप में विकसित हुआ। उस समय इस जगह का  नाम साकेत था।

साथ ही हेनत्सांग के अनुसार यहां 20 बौद्ध मंदिर थे जहाँ  3,000 भिक्षु रहते थे और यहां हिन्दुओं का एक प्रमुख और भव्य मंदिर भी था, जहां रोज हजारों की संख्या में लोग दर्शन करने आते थे।

इसके बाद आक्रमणकारियों के आक्रमण बढ़ने लगे और धीरे धीरे उन्होंने भारत की विभिन जगहों पर लूटपाट करना शुरू कर,हालंकि उनके द्वारा अयोध्या पर भी आक्रमण करने की कोशिश की पर सफल न हुए और चौहदवी सदी के तक अयोध्या में राम मंदिर को लूटा या तोडा नहीं गया।

माना ये जाता है की सिकंदर लोदी के शाशन काल के दौरान यहाँ मंदिर मौजूद था ,लेकिन 14 वीं शताब्दी के मध्य में मुगलो ने भारत पर अधिकार हो गया और धीरे  धीरे राम मन्दिर तोड़ने के लिए योजनाए बन ने लगी और 1528 के आस पास उसे तोड़ दिया गया और उसकी जगह बाबरी मस्जिद बना दिया गया|

बाबरनामा  के अनुसार 1528 में बाबरी मस्जिद बनाने का आदेश दिया गया ,हालांकि यह भी कहा जाता है कि अकबर और जहांगीर के शासनकाल में हिन्दुओं को यह भूमि एक चबूतरे के रूप में  सौंप दी गई थी लेकिन क्रूर शासक औरंगजेब ने अपने पूर्वज बाबर के सपने को पूरा करते हुए यहां भव्य मस्जिद का निर्माण कर उसका नाम बाबरी मस्जिद रख दिया था।

इतिहासकार कनिंघम अपने 'लखनऊ गजेटियर' के 66वें अंक के पृष्ठ 3 में लिखते है कि 1,74,000 हिन्दुओं की लाशें गिर जाने के पश्चात मीर बकी अपने मंदिर ध्वस्त करने के अभियान में सफल हुआ।

आइये क्रॉनिकल आर्डर में समझते है की आखिर कैसे कैसे क्या कुछ हुआ ?

सन 1528 : अयोध्या में एक ऐसे स्थल पर एक मस्जिद का निर्माण किया गया, जिसे कुछ हिंदू भगवान राम का जन्म स्थान मानते हैं

सन 1853 :पहली बार इस स्थल के पास सांप्रदायिक दंगे हुए। समझा जाता है कि मुग़ल सम्राट बाबर ने यह मस्जिद बनवाई थी, जिस कारण इसे बाबरी मस्जिद के नाम से जाना जाता था।अब कुछ हिंदू संगठन उस जगह पर राम मंदिर बनाना चाहते हैं।

इसके बाद 1949 : भगवान राम की मूर्तियां मस्जिद में पाई गईं। कथित रूप से कुछ हिंदूओं ने ये मूर्तियां वहां रखवाई थीं। मुसलमानों ने इस पर विरोध व्यक्त किया और दोनों पक्षों ने अदालत में मुक़दमा दायर कर दिया। सरकार ने इस स्थल को विवादित घोषित करके यहां ताला लगा दिया।

सन  1989 :  विश्व हिंदू परिषद ने राम मंदिर निर्माण के लिए अभियान तेज़ किया और विवादित स्थल के नज़दीक राम मंदिर की नींव रखी।इसके बाद 1990 में  विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं ने बाबरी मस्जिद को कुछ नुक़सान पहुँचाया। तत्कालीन प्रधानमंत्री चंद्रशेखर ने वार्ता के ज़रिए विवाद सुलझाने की कोशिश की मगर कामयाबी नहीं मिली।

सन 1992 : विश्व हिंदू परिषद, शिव सेना और भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने 6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद को गिरा दिया। इसके बाद देश भर में हिंदू और मुसलमानों के बीच सांप्रदायिक दंगे भड़क उठे। इन दंगों में 2000 से ज़्यादा लोग मारे गए।

13 मार्च, 2002  को  सर्वोच्च न्यायालय ने अपने फ़ैसले में कहा कि अयोध्या में यथास्थिति बरक़रार रखी जाएगी और किसी को भी सरकार द्वारा अधिग्रहीत ज़मीन पर शिलापूजन की अनुमति नहीं होगी। केंद्र सरकार ने कहा कि अदालत के फ़ैसले का पालन किया जाएगा।

जनवरी 2003 : रेडियो तरंगों के ज़रिए ये पता लगाने की कोशिश की गई कि क्या विवादित राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद परिसर के नीचे किसी प्राचीन इमारत के अवशेष दबे हैं, कोई पक्का निष्कर्ष नहीं निकला।

अप्रैल 2004 : आडवाणी ने अयोध्या में अस्थायी राममंदिर में पूजा की और कहा कि मंदिर का निर्माण ज़रूर किया जाएगा।

9 मार्च 2007 : कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने चुनावी दौरे के बीच कहा कि अगर नेहरू-गांधी परिवार का कोई सदस्य प्रधानमंत्री होता तो बाबरी मस्जिद न गिरी होती। उनके इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया हुई।

27 सितंबर 2018 : सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद से जुड़े 1994 वाले फ़ैसले पर पुनर्विचार से इनकार किया। उस फ़ैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि 'मस्जिद में नमाज़ पढ़ना इस्लाम का अभिन्न अंग नहीं है'। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने इस्माइल फ़ारुकी मामले को संवैधानिक पीठ के पास भेजने से भी इनकार कर दिया।

16 अक्टूबर 2019 को 40 दिन की हियरिंग के बाद संविधान पीठ ने फैसला सुरक्षित रखा,और 9 नवंबर 2019 को संविधान पीठ ने विवादित स्थल पर राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ कर दिया। और  सरकार को अयोध्या में एक प्रमुख स्थान पर मुसलमानों को पांच एकड़ भूमि प्रदान करने का आदेश दिया।

और आज इस भव्य मंदिर के निर्माण की आधारशिला रखी गयी है ,अयोध्या में भूमि पूजन बड़े भव्य तरिके से किया गया ,जिसे हमेशा हमेशा के लिए भारत के इतिहास में याद रखा जाएगा। 

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