Fri, July 03
सोलन
May 29,2020

भगवान शिव जब सती का क्षत-विक्षत शव अपने कंधे पर उठाकर कैलाश जा रहे थे, तो जहां-जहां सती के अंग गिरे, वहां शक्तिस्थल बन गए। इनमें से कुछ स्थल प्रसिद्ध हो गए और कुछ अभी भी उभरने बाकी हैं। इन्हीं में से एक शक्ति स्थल है मां चंडी देवी मंदिर, जो जिला सोलन की कसौली तहसील के तहत कुठाड़ क्षेत्र में आता है।
प्राचीन समय में यह इलाका कुठाड़ रियासत का हिस्सा था, जो चारों ओर से पहाडिय़ों से घिरा अब चंडी गांव के नाम से धार्मिक आस्था का केंद्र बन गया है। बताया जाता है कि चंडी गांव का नामकरण भी मां चंडी देवी के नाम से ही पड़ा। पौराणिक मान्यताओं के आधार पर मां चंडी यहां पिंडी रूप में प्रकट हुई थी। कहते हैं कि एक किसान अपने खेत में हल चला रहा था तो अचानक फाले में खून लगा दिखा। उसने जब खेत में ध्यान से देखा तो पाया कि यह खून एक पत्थर की पिंडी के ऊपरी हिस्से से बह रहा था। बाद में इसकी जानकारी किसान ने अपने घर व गांववालों को दी तो सभी हैरान रह गए। इस घटना के बाद एक रात को किसान को स्वप्न में मां काली अर्थात चंडी का साक्षात्कार हुआ।  इसमें माता ने किसान से कहा कि मुझे वहीं पर पिंडी रूप में स्थापित करके पूजा करें, जिससे उसका व सारे क्षेत्र का भला होगा। ऐसे में किसान सहित गांव के लोगों ने उस पिंडी को चौकी बनाकर स्थापित किया, बाद के समय में पट्टा महलोग रियासत के प्रबंधक मियां भवानी सिंह ने यहां चंडी मंदिर की स्थापना करवाई।
बाद में यहां विधिवत रूप से माता की पूजा-अर्चना होने लगी और प्रतिवर्ष विशाल मेला भी आयोजित किया जाने लगा। यह मेला हर वर्ष 15-16 ज्येष्ठ  यानि 28 व 29 मई को मां चंडी देवी मंदिर के परिसर व आसपास लगता है। इस बार कोरोना संक्रमण के कारण यह मेला नहीं मनाया गया, लेकिन पुजारी व कमेटी सदस्यों ने प्राचीन परंपरा के अनुसार यहां विधिवत पूजा-अर्चना करके रस्म निभाई।

 

- चंडी से चंद्रमोहन शर्मा की रिपोर्ट। 

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